Kirjailija
Devaki Nandan Khatri
Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 18 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2015–2024, suosituimpiin kuuluu Chandrakanta Santati II. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.
18 kirjaa
Kirjojen julkaisuvuodet: 2015–2024.
चंद्रकांता देवकी नंदन खत्री की एक अमर हिंदी क्लासिक है, जो प्रेम, रोमांच और फंतासी का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। राजसी साम्राज्यों और जादुई तिलिस्मों की पृष्ठभूमि में रची गई यह कहानी राजकुमारी चंद्रकांता और राजकुमार वीरेंद्र सिंह के प्रेम और संघर्ष की है। वे रहस्यमय जालों, शत्रुओं की चालों, और जादुई रहस्यों को पार करते हुए अपने प्यार को पाने की कोशिश करते हैं। यह उपन्यास भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसने पाठकों को रोमांच और रहस्य से भरी एक अद्वितीय दुनिया से परिचित कराया। देवकी नंदन खत्री की कल्पनाशील शैली और सजीव वर्णन ने चंद्रकांता को हिंदी साहित्य का एक अद्वितीय और स्थायी रत्न बना दिया है, जिसने फिल्म और टेलीविजन में भी प्रेरणा दी है और भारतीय फंतासी कथा की आधारशिला के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
चंद्रकांता देवकी नंदन खत्री की एक अमर हिंदी क्लासिक है, जो प्रेम, रोमांच और फंतासी का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। राजसी साम्राज्यों और जादुई तिलिस्मों की पृष्ठभूमि में रची गई यह कहानी राजकुमारी चंद्रकांता और राजकुमार वीरेंद्र सिंह के प्रेम और संघर्ष की है। वे रहस्यमय जालों, शत्रुओं की चालों, और जादुई रहस्यों को पार करते हुए अपने प्यार को पाने की कोशिश करते हैं। यह उपन्यास भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसने पाठकों को रोमांच और रहस्य से भरी एक अद्वितीय दुनिया से परिचित कराया। देवकी नंदन खत्री की कल्पनाशील शैली और सजीव वर्णन ने चंद्रकांता को हिंदी साहित्य का एक अद्वितीय और स्थायी रत्न बना दिया है, जिसने फिल्म और टेलीविजन में भी प्रेरणा दी है और भारतीय फंतासी कथा की आधारशिला के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
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Munshi Premchand; Devaki Nandan Khatri; Sarat Chandra Chattopadhyay
UNKNOWN
2024
sidottu
क्या आप हमेशा से अब तक लिखे गए सर्वश्रेष्ठ हिंदी रोमांस उपन्यास पढ़ना चाहते हैं?आगे कोई तलाश नहीं करें।ग्रेपवाइन पब्लिशर्स की अनुभवी संपादकीय टीम ने इस चुने हुए पैक को तैयार किया है। इस प्रतिष्ठित संग्रह में प्रशंसित पुस्तकें शामिल हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं और दुनिया को प्रभावित किया है। एक सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण संग्रह में कई पुस्तकें रखकर, आप एक ही कीमत पर कई पुस्तकों का आनंद ले सकते हैं इस संग्रह में, आप पाएंगे मुंशी प्रेमचंद की गबरमुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित निर्मलामुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमिदेवकी नंदन खत्री द्वारा चंद्रकांताशरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा परिणीताशरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित देवदासबंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा कपालकुंडलाप्रेमचंद, चंदू मेनन, देवकी नंदन खत्री और अन्य की कहानियों की दुनिया में एक आनंदमय यात्रा का आनंद लें
पठनीयता किसी भी उपन्यास की सबसे बड़ी ताकत होती है। यहाँ पठनीयता से तात्पर्य पाठक का किसी रचना के साथ आरम्भ से लेकर अंत तक गहरा सम्बन्ध स्थापित हो जाने से है। चन्द्रकान्ता संतति एक ऐसा ही उपन्यास है। हिंदी साहित्य के इतिहास में देवकीनंदन खत्री कृत 'चंद्रकांता संतति' एक ऐसा उपन्यास रहा है जिसने साहित्य के पाठकों के बीच में तहलका मचा दिया था। एक ऐय्यारी उपन्यास के रूप में प्रसिद्ध यह उपन्यास घटना प्रधान, तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक तथा ऐय्यारी की पृष्ठभूमि पर संजोया गया है। इस उपन्यास की खास बात यह भी है कि जब यह उपन्यास प्रकाशित होकर पाठकों के हाथों में आया तब लोगों के बीच इसे पढ़ने की इच्छा बहुत बढ़ गयी। इसकी प्रसिद्धि का स्तर कुछ यूं रहा कि गैर हिंदी भाषी लोग भी इसे पढ़ने के लिए हिंदी सीखने लगे।
पठनीयता किसी भी उपन्यास की सबसे बड़ी ताकत होती है। यहाँ पठनीयता से तात्पर्य पाठक का किसी रचना के साथ आरम्भ से लेकर अंत तक गहरा सम्बन्ध स्थापित हो जाने से है। चन्द्रकान्ता संतति एक ऐसा ही उपन्यास है। हिंदी साहित्य के इतिहास में देवकीनंदन खत्री कृत 'चंद्रकांता संतति' एक ऐसा उपन्यास रहा है जिसने साहित्य के पाठकों के बीच में तहलका मचा दिया था। एक ऐय्यारी उपन्यास के रूप में प्रसिद्ध यह उपन्यास घटना प्रधान, तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक तथा ऐय्यारी की पृष्ठभूमि पर संजोया गया है। इस उपन्यास की खास बात यह भी है कि जब यह उपन्यास प्रकाशित होकर पाठकों के हाथों में आया तब लोगों के बीच इसे पढ़ने की इच्छा बहुत बढ़ गयी। इसकी प्रसिद्धि का स्तर कुछ यूं रहा कि गैर हिंदी भाषी लोग भी इसे पढ़ने के लिए हिंदी सीखने लगे।
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किसी तरह किसी की लौ तभी तक लगी रहती है जब तक कोई दूसरा आदमी किसी तरह की चोट उसके दिमाग पर न दे और उसके ध्यान को छेड़ कर न बिगाड़े, इसीलिए योगियों को एकांत में बैठना कहा है। कुँवर वीरेंद्र सिंह और कुमारी चन्द्रकांता की मुहब्बत बाज़ारू न थी, वे दोनों एक रूप हो रहे थे, दिल ही दिल में अपनी जुदाई का सदमा एक ने दूसरे से कहा और दोनों समझ गए मगर किसी पास वाले को मालूम न हुआ, क्यूंकि ज़ुबान दोनों की बंद थी। -देवकीनन्दन खत्री
पठनीयता किसी भी उपन्यास की सबसे बड़ी ताकत होती है। यहाँ पठनीयता से तात्पर्य पाठक का किसी रचना के साथ आरम्भ से लेकर अंत तक गहरा सम्बन्ध स्थापित हो जाने से है। चन्द्रकान्ता संतति एक ऐसा ही उपन्यास है। हिंदी साहित्य के इतिहास में देवकीनंदन खत्री कृत 'चंद्रकांता संतति' एक ऐसा उपन्यास रहा है जिसने साहित्य के पाठकों के बीच में तहलका मचा दिया था। एक ऐय्यारी उपन्यास के रूप में प्रसिद्ध यह उपन्यास घटना प्रधान, तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक तथा ऐय्यारी की पृष्ठभूमि पर संजोया गया है। इस उपन्यास की खास बात यह भी है कि जब यह उपन्यास प्रकाशित होकर पाठकों के हाथों में आया तब लोगों के बीच इसे पढ़ने की इच्छा बहुत बढ़ गयी। इसकी प्रसिद्धि का स्तर कुछ यूं रहा कि गैर हिंदी भाषी लोग भी इसे पढ़ने के लिए हिंदी सीखने लगे।
Chandrakanta Santati II
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta Santati VI
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta Santati IV
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta Santati III
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta Santati V
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta Santati: Part I
Devaki Nandan Khatri
Createspace Independent Publishing Platform
2017
nidottu
Chandrakanta is a popular epic fantasy Hindi novel by Devaki Nandan Khatri. Published in 1888, it was the first modern Hindi novel. 1] It gained a cult following, and contributed to the popularity of the Hindi language. The story is a romantic fantasy about two lovers who belong to rival kingdoms: the princess Chandrakanta of Vijaygarh, and the prince Virendra Singh of Naugarh. Krur Singh, a member of the Vijaygarh king's court dreams of marrying Chandrakanta and taking over the throne. When Krur Singh fails in his endeavour, he flees the kingdom and befriends Shivdutt, the powerful neighbouring king of Chunargarh (a renaming of "Chunar-fort," referring to the fort in Chunar that inspired Khatri to write the novel). Krur Singh coaxes Shivdutt to ensnare Chandrakanta at any cost. Shivdutt captures Chandrakanta and while running away from Shivdutt, Chandrakanta finds herself a prisoner in a tilism. After that Kunvar Virendra Singh breaks the tilism and fights with Shivdutt with the help of aiyyars. Chandrakanta, the novel, has many sequels, prominent being a 7-book series (Chandrakanta santati) dealing with the adventures of Chandrakanta and Virendra Singh's children in another major tilism.
Chandrakanta, Devaki Nandan Khatri's extraordinary novel, first published in 1888, is set in the courtly world of princes and princesses, magnificent palaces and gardens.