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Kirjailija

Jaishankar Prasad

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 133 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2015–2025, suosituimpiin kuuluu 21 Shreshtha Kahaniyan (21 ??????? ????????). Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

133 kirjaa

Kirjojen julkaisuvuodet: 2015–2025.

21 Shreshtha Kahaniyan (21 ??????? ????????)

21 Shreshtha Kahaniyan (21 ??????? ????????)

Jaishankar Prasad

diamond pocket books pvt ltd
2025
pokkari
'जयशंकर प्रसाद की 21 श्रेष्ठ कहानियाँ' हिंदी कथा साहित्य के उस स्वर्णिम युग का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ कल्पना, इतिहास, और गहन मानवीय भावनाएँ एकाकार होती हैं। छायावाद के प्रवर्तक प्रसाद जी अपनी कहानियों में जीवन की कोमल अनुभूतियों, राष्ट्रीय स्वाभिमान, और दार्शनिक गहराई का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। यह संकलन प्रसाद के कथा-शिल्प की परिपक्वता और विस्तार को दर्शाता है। इस संग्रह में संकलित कहानियाँ चाहे वह 'आकाशदीप' की त्यागपूर्ण प्रेम भावना हो, 'पुरस्कार' का कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय प्रेम का द्वंद्व हो, या 'गुंडा' की करुण और विद्रोही छवि हो पाठकों को समय और समाज की सीमाओं से परे ले जाती हैं। प्रसाद की कहानियाँ सिर्फ कथाएं नहीं हैं, बल्कि वे प्रेम, विरक्ति, बलिदान और मानवीय नियति के शाश्वत प्रश्नों पर चिंतन प्रस्तुत करती हैं। प्रसाद की भाषा-शैली अत्यंत काव्यात्मक, संस्कृतनिष्ठ और चित्रात्मक है, जो पाठकों के मन में एक रोमानी और रहस्यमय संसार रचती है। वे मनोविज्ञान और इतिहास का कुशल प्रयोग करके अपने पात्रों को एक गरिमा और गहराई प्रदान करते हैं। यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए अनिवार्य है जो हिंदी कहानी के विकास में ऐतिहासिक मोड़ लाने वाले इस महान लेखक की संवेदना की गहराई और कलात्मक श्रेष्ठता को समझना चाहते हैं।
Kankal ????? (Hindi Edition)

Kankal ????? (Hindi Edition)

Jaishankar Prasad

Blurb
2025
pokkari
जयशंकर प्रसाद कृत प्रस्तुत उपन्यास 'कंकाल' एक ऐसी कृति है जिसमें यथार्थ को इंगित किया गया है। इस उपन्यास में देश की सामाजिक और धार्मिक स्थिति के साथ-साथ प्रेम-विवाह से लेकर जाति-वर्ण तथा व्यक्ति-समाज जैसी समस्याओं पर भी लेखक ने बारीकी से प्रकाश डाला है।
Tittli

Tittli

Jaishankar Prasad

Prabhakar Prakashan
2024
nidottu
चार्टली साहब की नील-कोठी टूट चुकी थी। नील का काम बंद हो चला था। जैसा आज भी दिलाई देता है, तब 'भी उस गोदाम के हौज और पक्की नालियां अपना खाली मुंह खोले पड़ी रहती थी, जिससे नीम की छाया में गाए बैठकर विभाग लेती थीं। पर बार्टली साहब को वह ऊंचे टीले का बंगला, जिसके नीचे बड़ा-सा ताल था, बहुत ही पसंद था। नील गोदाम बंद हो जाने पर भी उनका बहुत-सा रुपया दादनी में फसा था। किसानों को नील बोना तो बंद कर देना पड़ा, पर रुपया देना ही पड़ता। अन्न की खेती से उतना रुपया कहां निकलता, इसलिए आस-पास के किसानों में बड़ी हलचल मची थी। बार्टली के किसान आसामियों में एक देवनन्दन भी थे। मैं उनका आश्रित ब्राह्मण था। मुझे अन्न मिलता था और में काशी में जाकर पढ़ता था। काशी की उन दिनों की पंडित-मंडली में स्वामी दयानन्द के आ जाने से हलचल मची हुई थी। दुर्गाकुंड के उस शास्त्रार्थ में मैं भी अपने गुरुजी के साथ दर्शक-रूप से था; जिसमें स्वामीजी के साथ बनारसी चाल चली गई थी। ताली तो मैंने भी पीट दी थी। मैं क्वीन्स कॉलेज के एग्लो-संस्कृत विभाग में पढ़ता था। मुझे वह नाटक अच्छा न लगा। उस निर्भीक संन्यासी की ओर मेरा मन आकर्षित हो गया। वहां से लौटकर गुरुजी से मेरी कहा-सुनी हो गई, और जब मैं स्वामीजी का पक्ष समर्थन करने लगा, तो गुरुजी ने मुझे नास्तिक कहकर फटकारा। -इसी पुस्तक से
Jaishankar Prasad Ki Sarva-Shrestha Kahaniyaanindrajaal; Chhota Jadugar; Paap Ki Parajay & Other Stories
इस पुस्तक में 28 कहानियाँ संकलित हैं। आकाशदीप, प्रतिध्वनि, अपराधी, बनंजारा और चूड़ीवाली को आंतरिक पुनर्जागरण का संपुष्ट कहना अतिशयोक्त नहीं होगी। ग्राम, रसिया बालम, शरणागत, सिकंदर की शपथ, अशोक, जहाँनारा, मदन-मृणालिनी भी इसी श्रेणी की कहानियाँ हैं। इंद्रजाल, में 'मन का मन से वार्तालाप' बहुत सुंदर है। छोटा जादूगर, में दायित्व बोध का संदेश है। नूरी, गुंडा, अनबोला, विराम चिन्ह जैसी रचनाओं में भीतरी व वाह्य का द्वंद का अंतर सम्मिश्रण है। इस तरह वह इतिहास व यथार्थ के सम्मिश्रण की कहानियों से आगे बढ़े हैं। उनकी लगभग सभी कहानियों में व्यक्ति की छटपटाहट है, जो कभी समाज की कुरीतियों से लड़ती है तो कभी स्वयं से। यही मार्मिकता उन्हें जनसाधारण का लेखक निरूपित करता है। प्रसाद जी के द्वारा लिखी गई विभिन्न विधाओं में जो भी रचनाएँ हैं वह इनकी गहन अध्ययन शीलता का परिणाम है। प्रसाद की कहानियों में चित्रात्मकता, नाटकीयता, आंतरिक संघर्ष, भीतरी और बाहरी दोनों को अभिव्यक्त करने की पूरी क्षमता है। इतना ही नहीं प्रसाद जी की कहानियों में जहाँ एक ओर भावनाओं की तीव्रता और मनोवेगों का चित्रण है, वहीं दूसरी ओर वह कहानी को बांधकर रखते हैं। ये कहानियाँ हमें उनके व्यक्तित्व को समझने में न केवल सहायक होंगी, बल्कि उनके और नज़दीक ले जाएँगी।
Jaishankar Prasad Ki Sarva-Shrestha Kahaniyaanindrajaal; Chhota Jadugar; Paap Ki Parajay & Other Stories
इस पुस्तक में 28 कहानियाँ संकलित हैं। आकाशदीप, प्रतिध्वनि, अपराधी, बनंजारा और चूड़ीवाली को आंतरिक पुनर्जागरण का संपुष्ट कहना अतिशयोक्त नहीं होगी। ग्राम, रसिया बालम, शरणागत, सिकंदर की शपथ, अशोक, जहाँनारा, मदन-मृणालिनी भी इसी श्रेणी की कहानियाँ हैं। इंद्रजाल, में 'मन का मन से वार्तालाप' बहुत सुंदर है। छोटा जादूगर, में दायित्व बोध का संदेश है। नूरी, गुंडा, अनबोला, विराम चिन्ह जैसी रचनाओं में भीतरी व वाह्य का द्वंद का अंतर सम्मिश्रण है। इस तरह वह इतिहास व यथार्थ के सम्मिश्रण की कहानियों से आगे बढ़े हैं। उनकी लगभग सभी कहानियों में व्यक्ति की छटपटाहट है, जो कभी समाज की कुरीतियों से लड़ती है तो कभी स्वयं से। यही मार्मिकता उन्हें जनसाधारण का लेखक निरूपित करता है। प्रसाद जी के द्वारा लिखी गई विभिन्न विधाओं में जो भी रचनाएँ हैं वह इनकी गहन अध्ययन शीलता का परिणाम है। प्रसाद की कहानियों में चित्रात्मकता, नाटकीयता, आंतरिक संघर्ष, भीतरी और बाहरी दोनों को अभिव्यक्त करने की पूरी क्षमता है। इतना ही नहीं प्रसाद जी की कहानियों में जहाँ एक ओर भावनाओं की तीव्रता और मनोवेगों का चित्रण है, वहीं दूसरी ओर वह कहानी को बांधकर रखते हैं। ये कहानियाँ हमें उनके व्यक्तित्व को समझने में न केवल सहायक होंगी, बल्कि उनके और नज़दीक ले जाएँगी।
Kankal

Kankal

Jaishankar Prasad

Popular Prakashan Ltd ,India
2023
nidottu
Kankaal This book is a result of an effort made by us towards making a contribution to the preservation and repair of original classic literature. In an attempt to preserve, improve and recreate the original content, we have worked towards: 1. Type-setting & Reformatting: The complete work has been re-designed via professional layout, formatting and type-setting tools to re-create the same edition with rich typography, graphics, high quality images, and table elements, giving our readers the feel of holding a 'fresh and newly' reprinted and/or revised edition, as opposed to other scanned & printed (Optical Character Recognition - OCR) reproductions. 2. Correction of imperfections: As the work was re-created from the scratch, therefore, it was vetted to rectify certain conventional norms with regard to typographical mistakes, hyphenations, punctuations, blurred images, missing content/pages, and/or other related subject matters, upon our consideration. Every attempt was made to rectify the imperfections related to omitted constructs in the original edition via other references. However, a few of such imperfections which could not be rectified due to intentional\unintentional omission of content in the original edition, were inherited and preserved from the original work to maintain the authenticity and construct, relevant to the work. We believe that this work holds historical, cultural and/or intellectual importance in the literary works community, therefore despite the oddities, we accounted the work for print as a part of our continuing effort towards preservation of literary work and our contribution towards the development of the society as a whole, driven by our beliefs. We are grateful to our readers for putting their faith in us and accepting our imperfections with regard to preservation of the historical content. HAPPY READING
Jaishankar Prasad Ki Chuni Hui Kahaniyaan

Jaishankar Prasad Ki Chuni Hui Kahaniyaan

Jaishankar Prasad

Rajpal Sons
2023
nidottu
''...कल्पना के विस्तृत गगन में कहानी घूमने का अवकाश देती है जिसमें पाठकों को विस्तृत आनन्द मिलता है'' कहानी के सम्बन्ध में जयशंकर प्रसाद का यह कहना था और प्रायः उनकी सभी कहानियों में यह देखने को मिलता है। उनकी कहानियाँ बहुत कुछ कहते हुए भी बहुत कुछ अनकहा छोड़ देती हैं। जयशंकर प्रसाद की पहली कहानी, 'ग्राम' 1911 में इन्दु पत्रिका में प्रकाशित हुई। उन्होंने अपने जीवनकाल में 70 कहानियाँ लिखीं जो पाँच कहानी-संग्रहों में प्रकाशित हुईं। माना जाता है कि जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ आधुनिक सोच की कहानियाँ हैं और शायद इसीलिए आज भी पाठकों में लोकप्रिय हैं।
Chandragupt

Chandragupt

Jaishankar Prasad

Prabhakar Prakashan Private Limited
2022
pokkari
जयशंकर प्रसाद, छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं। ये एक सुप्रसिद्ध नाटककार के रूप में विख्यात हैं और छायावाद के जनक माने जाते हैं। इनके नाटक 'चन्द्रगुप्त' (1931) में विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस संघर्ष में भारत की विजय का यशोगान किया गया है। प्रसाद ने कई ऐतिहासिक नाटक लिखे हैं, जिनमें स्कंदगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु आदि प्रमुख रूप से विख्यात हैं। यह नाटक चार अंक का है। चन्द्रगुप्त और चाणक्य पर अनेक देशी और विदेशी लोगों ने बहुत कुछ लिखा है, लेकिन प्रसाद का यह नाटक उन सबसे भिन्न है । प्रसाद के समस्त नाटकों में यह सबसे विस्तृत और प्रौढ़ नाट्यकृति है। इस नाटक में कुल चार अंक और चवालीस दृश्य हैं। इनमें गीतों की संख्या तेरह है। इस नाटक में चन्द्रगुप्त की कथा के साथ-साथ और भी अन्य कथाओं को सम्मिलित किया गया है।
Kankal Paperback, Jaishankar Prasad

Kankal Paperback, Jaishankar Prasad

Jaishankar Prasad

Prabhakar Prakashan Private Limited
2021
pokkari
हिंदी साहित्य जगत् के महान साहित्यकारों में गिने जाने वाले युगप्रवर्तक साहित्यकार जयशंकर प्रसाद एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, वे हिन्दी कवि, कहानीकार, नाटककार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। इनका जन्म 30 जनवरी, 1889 ई० को बनारस के काशी, उत्तर प्रदेश के एक कलाप्रेमी परिवार में हुआ। जिसके माध्यम से उनकी साहित्य में रुचि बनी। उनके साहित्य के प्रति इसी रुझान ने उन्हें हिंदी का एक महान लेखक सिद्ध किया। आधुनिक काल के छायावादी दौर के चार स्तंभों में एक स्तम्भ कहे जाने वाले प्रसाद ने अपनी लेखन की सूक्ष्मता एवं व्यापकता से न केवल उस युग को देदीप्यपूर्ण बनाया, बल्कि समूचा हिंदी जगत् को गौरवान्वित किया। कला वैविध्यता उनकी प्रमुख रचनाओं से प्रकट होता है- काव्य झरना, आंसू, लहर, कामायनी, प्रेम पथिक। कहानी आकाशदीप, गुंडा, पुरस्कार, सालवती, स्वर्ग के खंडहर में आँधी, इंद्रजाल, छोटा जादूगर, बिसाती, मधुआ, विरामचिह्न, समुद्रसंतरण। उपन्यास कंकाल, इरावती, तितली। नाटक स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग, यज्ञ, राज्यश्री, कामना, एक घूंट। प्रसाद ने साहित्य को एक अलग दृष्टि दी, उन्होंने द्विवेदी युग की इत्तिवृतात्मकता को भाव, रस तथा सरस संगीत से सराबोर किया, भारत के उन्नत अतीत को जीवंत कर राष्ट्रप्रेम को जाग्रत किया, आदि से अंत तक भारतीय संस्कृति एवं आदर्शो की भी रक्षा की। अतः संक्षेप में इनकी रचनाओं की शिल्पगत विधि, भाषासौष्ठव तथा भावाभिव्यक्ति ने ही इन्हें एक महान साहित्यकार बनाया
Kamayani

Kamayani

Jaishankar Prasad

Prabhakar Prakashan Private Limited
2021
pokkari
हिंदी साहित्य जगत् के महान साहित्यकारों में गिने जाने वाले युगप्रवर्तक साहित्यकार जयशंकर प्रसाद एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, वे हिन्दी कवि, कहानीकार, नाटककार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। इनका जन्म 30 जनवरी, 1889 ई० को बनारस के काशी, उत्तर प्रदेश के एक कलाप्रेमी परिवार में हुआ। जिसके माध्यम से उनकी साहित्य में रुचि बनी। उनके साहित्य के प्रति इसी रुझान ने उन्हें हिंदी का एक महान लेखक सिद्ध किया। आधुनिक काल के छायावादी दौर के चार स्तंभों में एक स्तम्भ कहे जाने वाले प्रसाद ने अपनी लेखन की सूक्ष्मता एवं व्यापकता से न केवल उस युग को देदीप्यपूर्ण बनाया, बल्कि समूचा हिंदी जगत् को गौरवान्वित किया। कला वैविध्यता उनकी प्रमुख रचनाओं से प्रकट होता है- काव्य झरना, आंसू, लहर, कामायनी, प्रेम पथिक। कहानी आकाशदीप, गुंडा, पुरस्कार, सालवती, स्वर्ग के खंडहर में आँधी, इंद्रजाल, छोटा जादूगर, बिसाती, मधुआ, विरामचिह्न, समुद्रसंतरण। उपन्यास कंकाल, इरावती, तितली। नाटक स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग, यज्ञ, राज्यश्री, कामना, एक घूंट। प्रसाद ने साहित्य को एक अलग दृष्टि दी, उन्होंने द्विवेदी युग की इत्तिवृतात्मकता को भाव, रस तथा सरस संगीत से सराबोर किया, भारत के उन्नत अतीत को जीवंत कर राष्ट्रप्रेम को जाग्रत किया, आदि से अंत तक भारतीय संस्कृति एवं आदर्शो की भी रक्षा की। अतः संक्षेप में इनकी रचनाओं की शिल्पगत विधि, भाषासौष्ठव तथा भावाभिव्यक्ति ने ही इन्हें एक महान साहित्यकार बनाया