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Kirjailija

Kavita Kane

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 12 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2014–2023, suosituimpiin kuuluu Sita's Sister. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

12 kirjaa

Kirjojen julkaisuvuodet: 2014–2023.

Sita's Sister

Sita's Sister

Kavita Kane

MANJUL PUBLISHING HOUSE PVT LTD
2021
nidottu
ही कथा ऊर्मिलेची आहे. रामायणात तिच्याकडे अतिशय दुर्लक्ष झालं आहे. जशी सीता रामाबरोबर वनवासात गेली, तशी ऊर्मिलादेखील लक्ष्मणाच्या पावलावर पाऊल टाकत वनवास पत्करू शकली असती; परंतु तिने तसं केलं नाही. पतीच्या विरहामुळे उद्भवलेल्या आपत्तीचा सामना करताना तिने दाखवलेला खंबीरपणा कौतुकास्पद होता. लक्ष्मणाची वाट पाहत चौदा वर्षांचा प्रदीर्घ काळ एकटीने राजप्रासादात घालवण्याचा निर्णय ऊर्मिलेने का घेतला? ऊर्मिलेने सांगितलेली ही जीवनकथा तुम्हाला नक्कीच मोहित करेल.
TARA'S TRUCE

TARA'S TRUCE

KAVITA KANE

Rupa Publications India Pvt. Ltd
2023
nidottu
'Do we mean anything' Tara questioned hopelessly. 'Are our desires, our dreams relevant to the course of destiny at all' Tara. Vali's wife; Sugriv's queen; the woman behind Rama's curse. A person of extraordinary intellect, foresight and determination, Tara is a master stateswoman, both before and after she marries Vali and is crowned the queen of Kishkindh. But her wisdom and stature cannot stand in the way of destiny. Tara finds herself caught in a battle of egos between the two brothers and reduced to the victor's trophy. However, in this time of conflict, she resourcefully restores peace and prosperity in the kingdom she helped build, even if it means sacrificing everything. Kavita Kan , in her latest recounting of the Ramayana, narrates the tale of Tara's truce-the compromises Tara made to fulfil her divinely ordained purpose, including marrying her husband's killer.
Menaka's Choice

Menaka's Choice

Kavita Kane; Rachna Bhola 'yamini'

MANJUL PUBLISHING HOUSE PVT LTD
2022
pokkari
हम अप्सराएँ प्रेम करती हैं और छोड़ देती हैं। यही हमारा सूत्र है। मेनका, इसके साथ ही जियो, अन्यथा तुम्हें अनावश्यक और अकथनीय दुख सहन करना होगा' क्षीर-सागर मंथन के दौरान जन्मी मेनका, स्वर्ग की सभी अप्सराओं में से सर्वाधिक सुंदर थी, जो अपनी तीक्ष्ण बुद्धि व सहज प्रतिभा के लिए जानी जाती थी। हालांकि, वह सदा एक चीज़ के लिए तरसती रही जिसे वह कभी नहीं पा सकी - एक परिवार। कहीं दूर, गहन तप के बाद एक ऋषि को विश्वामित्र की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने देवों को चुनौती देते हुए, एक और स्वर्ग रचने का साहस दिखाया। उनकी बढ़ती हुई शक्तियों से भयभीत, स्वर्ग के राजा इंद्र निर्णय लेते हैं कि उनकी महत्वाकाक्षाओं पर रोक लगाने के लिए, मेनका को उन्हें लुभा कर पथभ्रष्ट करने के लिए भेजा जाए। जब मेनका और विश्वामित्र की भेंट होगी तो क्या होगा? क्या मेनका अंतत वह पा लेगी, जो वह वास्तव में पाना चाहती थी? अथवा उसे पुन नियति के आगे आत्मसमर्पण करने को विवश कर दिया जाएगा? जानिए सर्वाधिक चर्चित मिथकीय पात्रों में से एक के इस आकर्षक वर्णन के द्वारा।
Menakas Choice

Menakas Choice

Kavita Kane

MANJUL PUBLISHING HOUSE PVT LTD
2021
pokkari
दुग्धसागराच्या मंथनातून निर्माण झालेली मेनका ही सर्वांगसुंदर स्वर्गीय अप्सरा आहे. बुद्धी आणि चातुर्याचा अवीट संगम तिच्यात झाला आहे. सारी सुखं तिच्या पायापाशी हात जोडून उभी असताना तिला मात्र आस आहे कौटुंबिक सौख्याची - जे तिला कधीच मिळू शकणार नाही. दूर तिथे पृथ्वीवर कठोर तपश्चर्या करून एका मर्त्य मानवाने देवांना आव्हान दिलं आहे. प्रतिसृष्टी निर्माण करण्याची धमक असलेल्या या मानवाला विश्वामित्र म्हणून ओळखलं जातं. त्याच्या वाढत्या सामर्थ्याने देवराज इन्द्र सचिंत झाला आहे. विश्वामित्राच्या महत्त्वाकांक्षेला खीळ घालण्यासाठी, त्याची तपश्चर्या भंग करण्यासाठी देवेन्द्र मेनकेला पृथ्वीवर पाठवण्याचं ठरवतो. मेनका आणि विश्वामित्र एकमेकांना भेटल्यानंतर काय होईल? कौटुंबिक सौख्याची मेनकेची इच्छा पूर्ण होईल का? की पुन्हा एकदा तिला आपल्या दैवगतीला शरण जावं लागेल. पुराणकथेतील सर्वाधिक चित्तवेधक मोहक पात्रांना भेटा आणि जाणून घ्या.
Urmila

Urmila

Kavita Kane

MANJUL PUBLISHING HOUSE PVT LTD
2021
nidottu
विवाह में उर्मिला की अधिक रूचि नहीं थी लेकिन यह एक सामाजिक अनुशासन था जिसका पालन उसे भी करना होगा। वह विवाह करने की अपेक्षा ज्ञान अर्जन करना अधिक पसंद करेगी। निश्चित रूप से रामायण का जिक्र होते ही हम सभी के मन में राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, कौशल्या, रावण, मंदोदरी, यहां तक कि कैकेयी और मंथरा के चरित्र आते हैं। लेकिन इस पुस्तक में वैसी परिकल्पना नहीं है यह कहानी है उर्मिला की - सीता की बहन और इस महाकाव्य में सबसे उपेक्षित चरित्रों में से एक। जब सीता ने वनवास के लिए जाने की तैयारी की तो उसकी छोटी बहनें अयोध्या के उस अभिशप्त महल में ही रहीं। उनकी मुस्कुराहटें, आशाएं और आनंद एक ही झटके में तिरोहित हो गए। परंतु अपार शक्ति और द़ृढ़ निश्चय वाली उर्मिला दुख और आंसुओं से भरी इस परिस्थिति में भी अडिग खड़ी रही। उसके पति लक्ष्मण ने अपने भार्इ राम के साथ वन में जाने का निर्णय किया था। उर्मिला भी लक्ष्मण के साथ वन में जाने की ज़िद कर सकती थी, जैसा कि सीता ने किया था, लेकिन उर्मिला ने ऐसा नहीं किया। आखिर क्यों उर्मिला ने महल में ही रहने और पीड़ादायक चौदह वर्षों तक अपने पति की प्रतीक्षा करते रहने की सहमति दी? जानिये उर्मिला के द़ृष्टिकोण से कही गयी इस दिलचस्प कहानी में।.
Lanka KI Rajkumari

Lanka KI Rajkumari

Kavita Kane

MANJUL PUBLISHING HOUSE PVT LTD
2020
pokkari
लंका की राजकुमारी 'हां, में राक्षसी हूं ' मीनाक्षी ने चीखकर कहा। उसकी आंखें चमक रही थीं। उसने अपनी माँ को नाखून दिखाते हुए कहा, 'इन्हें देखा है? यदि किसी ने मुझे चोट पहुंचाई तो मैं उसे अपने नाखून से घायल कर दूंगी। मैं शूर्पणखा हूं ' रावण की प्रसिद्द बहन शूर्पणखा को सामान्य तौर पर कुरूप, जंगली, निर्दयी और निज माना जाता है। लक्ष्मण ने क्रोधवश शूर्पणखा की नाक काट दी थी। शूर्पणखा ने युद्ध का आरंभ किया, परंतु क्या सचमुच वह युद्ध आरंभ करने की दोषी थी? अथवा वह केवल परिस्तिथियों की शिकार थी? वह 'लंका की राजकुमारी' थी, या लंका के विनाश का कारण? शूर्पणखा का अर्थ है, एक ऐसी स्त्री जो नाखून की भांति कठोर हो। उसके जन्म का नाम मीनाक्षी था, अर्थात मछली जैसी सुंदर आंखों वाली। शूर्पणखा, रामायण की ऐसी पात्र है जिसे सदा गतल समझा गया है। वह उन भाइयों की छत्र-छाया में बड़ी हुई, जिनकी नियति में युद्ध लड़ना, जीतना तथा ख्याति व प्रतिष्ठा अर्जित करना लिखा था। परन्तु इस सबके विपरीत शूर्पणखा के जीवन का मार्ग पीड़ा और प्रतिशोध से भरा था। शूर्पणखा को राम और रावण के बीच घटनाओं को चालाकी से नियोजित करने का दोषी माना जाता है, जिसके फलस्वरूप राम व रावण में युद्ध हुआ और शूर्पणखा के संपूर्ण परिवार का विनाश हो गया। कविता काणे की यह पुस्तक हमें कुछ परिचित घटनाओं को उस शूर्पणखा की आंखों से देखने का अवसर देती है, जिससे संसार आवश्यकता से अधिक घृणा करता है..