मीनाक्षी सिंह जिंदगी को यथार्थ के चश्मे से देखने में भरोसा करती हैं। इनकी लेखनी में रोमांच और विविधता का अद्भुत मिश्रण होता है। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ खेलकूद में भी इनकी विशेष रूचि रही है। मीनाक्षी केन्द्रीय विद्यालय संगठन की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी की खिलाड़ी रही हैं। इसके अलावा बैडमिंटन की भी ये अच्छी खिलाड़ी हैं। शादी के बाद पारिवारिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ खेल के प्रति अपनी रूझान को इन्होंने बनाए रखा। मीनाक्षी ने जिला स्तर पर होने वाली कई प्रतियोगिताओं में ना केवल भाग लिया बल्कि पुरस्कार भी हासिल किए हैं। जीवन की सार्थकता को बनाए रखने के लिए मीनाक्षी समाजसेवी कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती हैं और वर्तमान में विभिन्न एनजीओ से जुड़ी हुई हैं। कविताएं लिखने में बचपन से ही इन्हें रूचि रही है। धीरे-धीरे कविता और गीत लिखने की धुन ने पन्ने भरने जो शुरू किए वो आज भी जारी है। इनकी कविताओं में रिश्तों की गर्माहट और भावनात्मक पहलुओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इनकी कविताओं के शब्द सजीव से लगते हैं, मानो अभी बोल पड़ेंगे। 'बातें जो कही नहीं गईं ' मीनाक्षी की पहली कविता संग्रह है। संपर्क सूत्र-
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