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Kirjailija

Sanjay Sahay

Kirjat ja teokset yhdessä paikassa: 5 kirjaa, julkaisuja vuosilta 2018–2019, suosituimpiin kuuluu Protected Cultivation of Flowers. Vertaile teosten hintoja ja tarkista saatavuus suomalaisista kirjakaupoista.

5 kirjaa

Kirjojen julkaisuvuodet: 2018–2019.

Protected Cultivation of Flowers

Protected Cultivation of Flowers

Sachin Tyagi; Sanjay Sahay

New India Publishing Agency- Nipa
2019
sidottu
Floriculture has garnered considerable attention from both farmers and scientists in recent times, particularly in terms of production and sales. This has prompted growers to explore and adopt technological solutions to enhance productivity. Adopting protected cultivation techniques is one such approach, and this book delivers valuable insights in this regard, courtesy of contributions from distinguished scientists and faculty members across the nation. Moreover, the book provides information on specific crops in a clear and concise manner, making it accessible to students who can comprehend the information provided.
Protected Cultivation of Flowers

Protected Cultivation of Flowers

Sachin Tyagi; Sanjay Sahay

New India Publishing Agency
2019
nidottu
Floriculture has been gaining considerable attention from both scientific and agricultural perspectives, leading to an increased demand for technological advancements in production. Adopting protected cultivation techniques is one such approach, and this book addresses this issue by providing information from renowned scientists and faculty members across the nation. The book also covers specific crops in an easily understandable manner, making it accessible to students.
Mulakat

Mulakat

Sanjay Sahay

Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd
2018
sidottu
नई कहानी के पारम्परिक ढाँचे को लगभग तोडक़र उदय प्रकाश, संजीव और शिवमूर्ति जैसे कथाकारों ने जो नई ज़मीन बनाई, उसे नब्बे के दशक में जिन कथाकारों ने विस्तार और गहराई देने का काम किया, उनमें संजय सहाय भी एक रहे। 1994 में 'हंस' में प्रकाशित अपनी कहानी 'शेषांत' के साथ उन्होंने हिन्दी कथा-साहित्य में जैसे एक नई लकीर खींच दी थी। बेशक, उन्होंने कहानियाँ कम लिखीं। लेकिन जब भी लिखीं, पाठकों को एक नया आस्वाद, एक नया अनुभव दिया। अब लगभग दो दशक बाद उनका यह नया कहानी-संग्रह 'मुलाकात' नए सिरे से याद दिलाता है कि जि़न्दगी की तरह कहानी में भी कितनी परतें हो सकती हैं। यह दरअसल शिल्प का कमाल नहीं, संवेदना की पकड़ है जो कथाकार को यह देखने की क्षमता देती है कि एक मुठभेड़ के भीतर कितनी मुठभेड़ें चलती रहती हैं, कि जब हम दूसरे को मारने निकलते हैं तो पहले कितना खुद को मारते हैं, कि जीवन कितना निरीह और फिर भी कितना मूल्यवान हो सकता है, कि एक पछतावा उम्र-भर किसी का इस तरह पीछा कर सकता है कि वह अपनी देह के खोल से निकलकर उस शख्स को खोजना चाहे जिसके साथ बचपन में कभी उसने अन्याय किया था, कि उसे एहसास हो कि यह अन्याय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक था और इस वजह से कहीं ज़्यादा मार्मिक और मारक हो गया था।ये कहानियाँ आपको तनाव से भर सकती हैं, आपको स्तब्ध कर सकती हैं और आपको इस तनाव से मुक्ति भी दिला सकती हैं, इस स्तब्धता से उबार भी सकती हैं। किस्सागोई की तरलता और जीवन के स्पन्दन से भरी इन कहानियों को पढऩा एक विलक्षण अनुभव है जो आपको कुछ और बना देता है।-प्रियदर्शन
Mulakat

Mulakat

Sanjay Sahay

Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd
2018
nidottu
नई कहानी के पारम्परिक ढाँचे को लगभग तोडक़र उदय प्रकाश, संजीव और शिवमूर्ति जैसे कथाकारों ने जो नई ज़मीन बनाई, उसे नब्बे के दशक में जिन कथाकारों ने विस्तार और गहराई देने का काम किया, उनमें संजय सहाय भी एक रहे। 1994 में 'हंस' में प्रकाशित अपनी कहानी 'शेषांत' के साथ उन्होंने हिन्दी कथा-साहित्य में जैसे एक नई लकीर खींच दी थी। बेशक, उन्होंने कहानियाँ कम लिखीं। लेकिन जब भी लिखीं, पाठकों को एक नया आस्वाद, एक नया अनुभव दिया। अब लगभग दो दशक बाद उनका यह नया कहानी-संग्रह 'मुलाकात' नए सिरे से याद दिलाता है कि जि़न्दगी की तरह कहानी में भी कितनी परतें हो सकती हैं। यह दरअसल शिल्प का कमाल नहीं, संवेदना की पकड़ है जो कथाकार को यह देखने की क्षमता देती है कि एक मुठभेड़ के भीतर कितनी मुठभेड़ें चलती रहती हैं, कि जब हम दूसरे को मारने निकलते हैं तो पहले कितना खुद को मारते हैं, कि जीवन कितना निरीह और फिर भी कितना मूल्यवान हो सकता है, कि एक पछतावा उम्र-भर किसी का इस तरह पीछा कर सकता है कि वह अपनी देह के खोल से निकलकर उस शख्स को खोजना चाहे जिसके साथ बचपन में कभी उसने अन्याय किया था, कि उसे एहसास हो कि यह अन्याय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक था और इस वजह से कहीं ज़्यादा मार्मिक और मारक हो गया था।ये कहानियाँ आपको तनाव से भर सकती हैं, आपको स्तब्ध कर सकती हैं और आपको इस तनाव से मुक्ति भी दिला सकती हैं, इस स्तब्धता से उबार भी सकती हैं। किस्सागोई की तरलता और जीवन के स्पन्दन से भरी इन कहानियों को पढऩा एक विलक्षण अनुभव है जो आपको कुछ और बना देता है।-प्रियदर्शन